Off Page SEO kya hai aur kaise kare

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सफल ब्लॉगर बनने के लिए सर्च इंजन optimisation जरुरी है। इससे फायदा ये होता है के गूगल से मुफ्त में भर भर के ट्रैफिक प्राप्त होता है। SEO के दो चरण होते हैं। On पेज SEO और ऑफ पेज SEO . पिछले आर्टिकल में on पेज seo के बारेमे चर्चा किये थे। इस आर्टिकल में समझेंगे ऑफ पेज seo क्या है और कैसे करे।

Off Page SEO kya hai aur kaise kare

सफल ब्लॉगर बनने के लिए सर्च इंजन optimisation जरुरी है। इससे फायदा ये होता है के गूगल से मुफ्त में भर भर के ट्रैफिक प्राप्त होता है। SEO के दो चरण होते हैं। On पेज SEO और ऑफ पेज SEO . पिछले आर्टिकल में on पेज seo के बारेमे चर्चा किये थे। इस आर्टिकल में समझेंगे ऑफ पेज seo क्या है और कैसे करे।

Off पेज SEO

अपने वेबसाइट के बाहर, दूसरे वेबसाइट पर अपनी वेबसाइट के वेबपेज के लिंक को शामिल कराना ही है ऑफ पेज seo है। कल्पना करिये, हम लोग कैसे समझ पाते हैं के अपने सेहर में कौनसी दूकान अछि मोबाइल फ़ोन के लिए मशहूर है ? ऐसे दूकान की चर्चा आम तौर पर अपने इर्द गिर्द होती रहती है। उसी तरह जिस वेबसाइट पर अछि क्वालिटी के कंटेंट होते हैं उसका लिंक आम तौर पर दूसरे वेबसाइट में नजर आते हैं। सर्च इंजन जैसे गूगल, बिंग इस बात को गंभीरता से लेते हैं।


साधारण शब्दों में कहें तो जितने ज्यादा अलग अलग वेबसाइट पर आपके वेबसाइट के वेबपेज के लिंक नजर आएंगे उतने ज्यादा आपकी साइट की मसहूरता सर्च इंजन के आँखों में दर्ज होगी।

ध्यान दें सर्च इंजन किसी भी क्वेरी पर उसी वेबसाइट के वेबपेज को सबसे ऊँचे स्थान पर दिखाता हैं जिस वेबसाइट की मसहूरता सबसे ज्यादा हो।

लेकिन यहाँ पर एक द्वन्द हैं। अगर किसी भी वेबसाइट के अंदर वेबपेज के लिंक शामिल कर दें तो सर्च इंजन इसे संज्ञान में नहीं लेंगे। सर्च इंजन आपके वेबसाइट के वेब पेज के लिंक को दूसरे वेबसाइट पर उपस्थिति को अपने संज्ञान में तभी लेंगे अगर दूसरा वेबसाइट की मसहूरता आपके वेबसाइट से ज्यादा हो। और हाँ आपकी वेबसाइट जिन विषयों के ऊपर आधारित है, उन्ही विषयों के वेबसाइट पर आपके वेबसाइट के लिंक उपस्थित हों।

एक दसक यहाँ तक के आधे दसक पहले तक कोई भी लेखक कोई आर्टिकल अपने वेबसाइट पर लिखते थे, तब वो उस आर्टिकल के संबधित दूसरे वेबसाइट के लिंक शामिल शामिल करते थे। इससे सर्च इंजन उन दूसरे वेबसाइट के लिंक को ज्यादा उपयोगी और ज्ञान बर्धक मानती थी। इससे उन दूसरे वेबसाइट को लाभ मिल जाता था। परन्तु धीरे धीरे समझ गए लोग के इससे दूसरे वेबसाइट को लाभ मिलता हैं इसलिए अपने आर्टिकल में लिंक शेयर करना बंद कर दिए।

इसलिए हमें हर वो तरकीब अपनाना होगा जिससे अपने वेबपेज के लिंक दूसरे वेबसाइट में उपस्थिति दर्ज करा सकें।

Backlink / लिंक Building

अपने वेबसाइट के लिंक को दूसरे वेबसाइट में शामिल कराने की कार्य को ही backlink या लिंक बिल्डिंग कहते हैं।

लिंक दो प्रकार के होते हैं -

१. do follow backlink

२. no follow backlink

चलिए अब दोनों में अंतर समझते हैं।

Do Follow Backlink vs No Follow Backlink

इन दोनों में अंतर समझने के लिए हमें पहले ध्यान देना होगा के लिंक कैसे लिखा जाता हैं ?

कोई भी वेबपेज एक HTML पेज होता हैं। और HTML इस्तेमाल कर लिंक बनाये जाते हैं।

Example

<a href="https://example.com/site1">Site 1</a>

<a href="https://example.com/site2">Site 2</a>

<a href="https://example.com/site3">Site 3</a>

<a href="https://example.com/site4">Site 4</a>

इसमें <a></a> को एंकर टैग कहते हैं। इसमें href के डबल quote के बीच जो लिंक मौजूद है उसको रेफेर लिंक कहते हैं।किसी भी वेबसाइट में जब लिंक बनाया जाता है तो इस प्रकार का HTML टैग का प्रयोग किया जाता है।

सर्च इंजन इन्ही लिंक में से वेबसाइट के लिंक को अपने डेटाबेस में दर्ज करते हैं।

ऐसे लिंक के प्रयोग एक वेबसाइट एक वेबपेज में दूसरे वेबपेज के लिंक बनाते है। साथ ही दूसरे वेबसाइट के वेबपेज लिंक भी बनाते हैं।

सर्च इंजन जब एक वेबसाइट में दूसरे वेबसाइट के लिंक की मौजूदगी जानते हैं तब वो ना सिर्फ उस दूसरे वेबसाइट की लिंक को अपने डेटाबेस में शामिल करते हैं बल्कि दूसरे वेबसाइट को रेपुटेड लिंक मानते हैं और अच्छे अंक प्रदान करते हैं।

अब यहाँ पर एक मसला हैं। मान लीजिये आपकी वेबसाइट की रेपुटेशन अछि है और आपने आपके वेबसाइट से कम रेपुटेशन वाली साइट का लिंक शेयर किये हैं। इससे उस साइट को बहुत बड़ा लाभ मिल सकता हैं। परन्तु आप नहीं चाहते आपके साइट का रेपुटेशन उस साइट को जाएं। तब हम सर्च इंजन को ये निर्देश दे सकते हैं।

इसके लिए इस्तेमाल होता है - nofollow लिंक।

एंकर टैग में rel एट्रिब्यूट एक जोड़ा जाता है और उसका वैल्यू nofollow सेट किया जाता हैं।

Example

<a href="https://externalsite.com/site2" rel="nofollow">Site 2</a>

<a href="https://externalsite.com/site3" rel="nofollow">Site 3</a>

<a href="https://externalsite.com/site4" rel="nofollow">Site 4</a>

इस प्रकार से nofollow लिंक लिखा जाता है। सर्च इंजन इससे समझ जायेंगे के ये जो एक्सटर्नल लिंक हैं इन् को रेपुटेशन मार्क पास नहीं करनी हैं।

अगर एंकर टैग में rel="nofollow" मौजूद नहीं हैं तब उस प्रकार लिंक को dofollow लिंक कहा जाता है।

Dofollow लिंक कब इस्तेमाल करें?

जब आप आपके वेबसाइट के दूसरे वेबपेज के लिंक बनाएं तब आप हमेसा डूफ़ॉलो लिंक इस्तेमाल करें। साथ ही आपके facebook पेज के लिंक और दूसरे सोशल मीडिया और आपके यूट्यूब चैनल के लिंक को dofollow लिंक रखें।

Nofollow लिंक कब इस्तेमाल करें ?

जब आप दूसरे वेबसाइट के लिंक को अपने वेबसाइट में शामिल करें और आपके पास कोई ठोस वजह ना हो डूफ़ॉलो लिंक सेट करने के लिए तब आप nofollow लिंक बनाएं।

लिंक बिल्डिंग कैसे करें?

लिंक बिल्डिंग करने के लिए कुछ सरल उपाय -

ब्लॉग कमेंटिंग

आपने जरूर गौर किया होगा बहुत सारे वेबसाइट अपने ब्लॉग आर्टिकल के निचे कमेंट करने के लिए विकल्प दे रखें हैं। वहां पर नाम, वेबसाइट की लिंक, ईमेल और मैसेज दर्ज करने के लिए विकल्प होते हैं। वाप वहां पर आपके साइट के लिंक शेयर कर मैसेज सबमिट करें।

फोरम कमेंटिंग

बहुत सारे फोरम जैसे quora, asksawal.com,answer.com साइट पर लोग हजारों की संख्या में सवाल पूछते हैं। आप उन सवालों के जवाब दे कर आप आपके लिंक शेयर करें।

सोशल मीडिया शेयरिंग

सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे ट्विटर फेसबुक लिंकेडीन पर बाढ़ जैसी ट्रैफिक मौजूद हैं। आप आपके वेबसाइट के लिंक निरंतर शेयर करते रहे।

गेस्ट पोस्ट सबमिशन

बहुत सारे वेबसाइट अपने वेबसाइट पर आर्टिकल सबमिशन के लिए विकल्प दे रखें हैं। और वो बदले में dofollow बैकलिंक देते हैं। आप गेस्ट पोस्ट सबमिट कर भी आपके साइट के लिए dofollow बैकलिंक बना सकते हैं।

वेब २.०

वेब २.० जैसे ब्लॉगर, वर्डप्रेस, विक्स जैसे साइट पर फ्री में ब्लॉग साइट बना कर आप आपके साइट के लिए बैकलिंक बना सकते हैं।

याद रखें नोफ़ॉलो बैकलिंक और डूफ़ॉलो बैकलिंक के बिच की रेश्यो (Ratio) : ७०% :३०% होना चाहिए। थोड़ा ऊपर निचे अगर होगा तब भी चलेगा।

Conclusion

उम्मीद हैं आप समझ गए होंगे के off पेज seo क्या हैं, डूफ़ॉलो बैकलिंक और nofollow बैकलिंक क्या है, और लिंक बिल्डिंग कैसे करें।

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